About The Movement

आजादी अधूरी है , रोजगार जरुरी है।

समस्या
भारत की बहुसंख्यक आबादी आज भी ‘ बेरोज़गारी’ के अंधेरे में दोयम जीवन यापन कर रहे हैं ।
आर्थिक संकटों के चलते देश की बड़ी आबादी को गुणवत्ता पूर्ण जीवन नहीं मिल पाता है।  इसे हम आजादी तो कह सकते है पर “पूर्ण आज़ादी” उस दिन कहलाएगी जब सभी के पास रोज़गार होगा।

समाधान
“निति और योजनाओं में सुधार के द्वारा प्रत्येक नागरिक को रोजगार की गारंटी अन्यथा गरिमापूर्ण जीवन यापन भत्ता मिले 

हमारे सर्वोच्च संविधान को आधार मान कर अक्सर हम अपने अधिकारों पर गर्व करते हैं l क्या सच में हमे गर्व होना चाहिए उन अधिकारों पर जो हो कर भी नहीं है, उदाहरण के तौर पर यदि हम ‘समानता के अधिकार, की बात करे तो एक प्रश्न हमेशा सामने आता हैl की आज के समय मे यह अधिकार कितना प्रासंगिक है, क्या सच में आज हमारे देश में सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं l क्या सच में आज हमारे देश में सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं l क्या सभी को रोजगार के समान अवसर मिलते हैं? यदि ऐसा है तो ये बेरोजगारी क्यूँ है, यदि ऐसा नहीं है तो इसका ज़िम्मेदार कौन है, इसके लिए जवाबदेह कौन है ?

इसके लिए जवाब हमारी सरकारे देंगी, जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी है l इस सवाल से हर सरकार बचती हैं l हमेशा एक समर्थ और विकसित भारत के बारे में बात करने वाली ये सरकारों से कोई ये नहीं पूछता की  बिना रोजगार को बढ़ाये ये विकास कैसे होगा l जब तक इस देश के युवा बेरोजगार हैं तब तक ये किस आधार पर विकास की बात करते हैं l 21 वी सदी जिसे आप सभी एक आधुनिक भारत की सदी भी मानते हैं, जहाँ रोजगार देने के लिए कदम तो उठा लिए जाते हैं, पर इन सरकारों की राजनीति करने की स्पर्धा में ये मॉडल भी बेरोजगारी की तरफ मुड़ जाते हैं जैसे मनरेगा की शुरुआत एक अच्छी पहल थी पर इन सरकारो की कुचालक व्यवस्था ने उसकी काया पलट कर दी lबात आज के समय की करे जब बेरोजगारी तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रही हैl या वो समय जो बीत गया इसी बेरोजगारी के साथ,या  फिर आने वाले समय की जिसमे बहुत से नये मॉडल और योज़नाये बना कर इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है l जैसे :- विभिन्न देशों की तर्ज़ पर देश के विकास मॉडल में बदलाव l किसान कार्ड की तरह बेरोजगार लोन की पहल करना l किसानो को कर्ज माफ़ी के बजाय फसलों के बेहतर दाम देना l काम की समय सीमा तय करना l इसी तरह की योज़नाओ की पहल करके बेरोजगारी को कम किया जा सकता है l यह भुला नहीं जा सकता इस कोरोना काल ने बेरोजगार मजदूरों को पैदल व भूखे और प्यासे मीलों का सफ़र करने पर मजबूर किया, और सरकारो के व्यवस्था और वादों की पोल देश नहीं पूरी दुनिया के सामने खोल कर रख दी  हैं.

हम कौन हैं ?

हमें चाहिए रोजगार’ एक गैर-राजनैतिक सामाजिक संगठन है।  भारत के विभिन्न हिस्सों के आमजन द्वारा यह संगठन गठित किया गया है
हम सभी का एक ही उद्देश्य है प्रत्येक भारतीय को सम्मानजनक व  गुणवत्ता पूर्ण जीवन जीने का पूर्ण अधिकार हो, यह तभी संभव हो सकता है जब सभी के पास रोजगार हो व सभी को रोजगार के समान अवसर प्राप्त हो। यह संगठन रोजगार की व्यापक उपलब्धता हेतु प्रतिबद्ध व अग्रसर है।  यही हमारे संविधान और गठन  की मूल भावना है।

हम क्यूँ?

आज के विकासशील भारत को आवश्यकता है , एक ऐसे जन आंदोलन की जिससे ‘बेरोजगारी’ को एक गंभीर समस्या के तौर पर देखा जाये व इसके प्रभावशाली उपायों को खोजा जाये।  
‘ हमें चाहिए रोजगार ‘ एक ऐसा मंच तैयार करने की दिशा में प्रयासरत है , जहाँ ‘बेरोजगारी’ को लेकर व एक बुलंद आवाज को उठाया जा सके। 

कैसे?

भारत की बड़ी आजादी और पर्याप्त मात्रा में संसाधनों के मद्देनजर यह आवश्यक है की प्रत्येक व्यक्ति के पास रोजगार उपलब्ध हो यदि ऐसा नहीं है, तो सरकार व्यक्ति को जीवन यापन हेतु आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु जवाबदेह  हो।  
‘ हमें चाहिए रोजगार ‘ मुख्य माँगे इस प्रकार हैं

अहम मुद्दे – रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाये जाये l 1- विभिन्न देशों के रोज़गार मॉडल की तर्ज़ पर भारत रोज़गार मॉडल में बदलाव करने चाहिए l 2- किसान कार्ड की तरह ही आधार कार्ड, पेन कार्ड, पासपोर्ट को आधार बना कर बेरोजगार लोन की शुरुआत करनी चाहिए l 3- निर्यात नीति में बदलाव करने चाहिए ताकि लघु उधोगों को बढ़ावा मिल सके l 4- नये नीति निर्माण – बड़ी कम्पनियों के कर और कर्ज की अदायगी को माफ ना किया जाये, इस राजस्व की रकम को नये उधोगों के निर्माण में लगाया जाये 5- किसानो को भी कर्ज़ माफ़ी की जगह फसलो के बेहतर दाम दिये जाये l 6 – उपलब्ध काम का बराबर बंटवारा हो  l 7 – सरकार द्वारा आज से 12 साल बाद किस काम की उपयोगिता होंगी इसे देखते हुए R&D करनी चाहियें और इसीके अनुसार शिक्षा छेत्र में बदलाव होने चाहिए 8 – राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय रोजगार नीति

इन मुद्दे पर कार्य करने से क्या बदलाव होंगे –
– बेरोजगारी कम होगी
– करदाताओं की संख्या बढ़ेगी जिससे देश का विकास होगा
– गरीबी में कमी आयेगी
– जीवन यापन स्तर में सुधार होगा
– उत्पादन में बढ़ोतरी होगी

बेरोजगारी भत्ता क्यों ?

यदि हमारी सरकार सभी को रोजगार देने में असफल है तो यह संवैधानिक तौर पर उनकी जवाबदेही होनी चाहिए कि वो सभी को बेरोजगारी भत्ता प्रदान करे !

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